मूर्तिकार की कहानी

मूर्तिकार की कहानी

परीचय :

यह कहानी मूर्तिकार की कहानी है, जिससे पता चलेगा की, डर के आगे सच में जीत है। आज जो  भी इंसान को आगे बढ़ने में जो भी परेशानी आ रही उसको सहन करके आगे बढ़ता है वह एक न एक दिन सफल हो जाता है।

जब मैं जॉब करता तो कभी कभी बॉस का प्रेशर बढ़ जाता था वो मुझे सहन नहीं होता लेकिन उस माहौल में रहकर में सहन करना सिख गया और सहन करने की आदत ने मेरे जीवन को सरल बनाया।

चलो शुरू करते है, मूर्तिकार की कहानी

एक मूर्तिकार एक पत्थर को छेन रहा था और हथौड़ी से उसका आकार दे रहा था। जब पत्थर काटा जा रहा था, तो उसे बहुत दर्द हो रहा था। उस पत्थर ने मूर्तिकार के सामने रोना शुरू किया। मूर्तिकार ने पूछा, “भाई, तुम रो क्यों रहे हो? मैं तो तुम्हें भगवान की मूर्ति का रूप दे रहा हूँ, आज तुम यह दर्द बर्दास्त करोगे तो कल लोग तुम्हें पूजेंगे।”

पत्थर ने कहा, “नहीं, मेरे लिए बहुत दर्द हो रहा है। कृपया मुझे छोड़ दो।”

मूर्तिकार की कहानी



मूर्तिकार ने उस पत्थर को वहीं छोड़ दिया और बगीचे में एक और पत्थर उठाया और उसका रूप देने लगा। दूसरे पत्थर ने भागवान के रूप को प्राप्त करने के लिए दर्द को बर्दास्त किया, और वह भगवान की मूर्ति बन गया। लोग अब उसको रोज़ माला और फूल चढ़ाने लगे।

और लोग ने रास्ते में पड़े उस पत्थर को (जिसने दर्द बर्दास्त नहीं किया था) लाकर उसी मंदिर में रख दिया, ताकि यह नारियल तोड़ने का काम कर सके।

पत्थर की कीमत कहानी

जिस पत्थर ने एक बार दर्द बर्दास्त नहीं किया, आज वह जीवनभर दर्द बर्दास्त कर रहा है। और जिसने सही समय पर एक बार दर्द बर्दास्त करने का सही विचार किया, वह भगवान बन गया है। आज उस पर माला और फूल चढ़ाया जाता है।

मूर्तिकार की कहानी सिख

मूर्तिकार की कहानी से सिख : इस कहानी की सिख को मैंने कविता के स्वरुप में लिखी है,

लोग कहते है चार दिन है जिंदगानी मत उठा परेशानी

लेकिन पॉजिटिव विचार वाला व्यक्ति कहता है सिर्फ और सिर्फ चार दिन की है जिंदगानी

जितने उतना सके उठा ले परेशानी, उठा कर पार कर ली परेशानी तो समझ लेना जी ली जिंदगानी

आशा करता हु, मूर्तिकार की कहानी पढ़कर हमे जीवन में परेशानियों से लड़ने की हिम्मत मिली होगी

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