मनोबल बढ़ाने वाली कहानी – चार मोमबत्तियाँ

मनोबल बढ़ाने वाली कहानी – चार मोमबत्तियाँ

परिचय:

यह कहानी मनोबल बढ़ाने वाली छोटी सी कहानी है! हर इंसान की सोच विचारधारा अलग होती है. इस कहानी में चार मोमबत्तियां है इस कहानी पढ़ने के बाद आपको निश्चय कर रहा है कि आप कौन से मोमबत्ती हो!

 चलो शुरू करते हैं, मनोबल बढ़ाने वाली कहानी

एक अंधेरे कमरे में चार मोमबत्तियाँ जल रही थीं! पहली मोमबत्ती ने अपना परिचय दिया, “मैं विश्वास हूँ!”

“मैं इस दुनिया में नहीं रहना चाहती! क्योंकि आज के युग में विश्वास नामक शब्द का मतलब बदल चुका है! असलियत में विश्वास की आस नहीं रही!”

मनोबल बढ़ाने वाली कहानी

“जिस पर ज्यादा विश्वास करोगे, वही तुम्हें पीड़ित करेगा! इसलिए मैं अपने जीवन का समापन करने जा रही हूँ!” उसके शब्दों से उसकी आँखें बुझ जाती हैं!

दूसरी मोमबत्ती आवाज़ देती है, “मेरा नाम शांति है! और यह दुनिया अशांति में डूबी हुई है!”

“जहाँ इतनी अशांति हो, वहाँ शांति नहीं रह सकती! क्या मैं कह रही हूँ कि अशांति ही रहेगी, या फिर मैं रहूँगी? हम दोनों साथ नहीं रह सकते!”

“और मुझे यह ज्ञात है कि अशांति हमेशा बढ़ती जाएगी! इसलिए मैं अपने जीवन को इसी समय समाप्त कर रही हूँ!” उसके शब्दों से उसकी आँखें बुझ जाती हैं!

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तीसरी मोमबत्ती अपना परिचय देती है, “मेरा नाम प्रेम है!”

“मैंने इस दुनिया से यह सिखा है कि प्रेम लोग स्वार्थ के लिए करते हैं! जिस दिन इंसान का स्वार्थ खत्म हो जाएगा, उस दिन प्रेम भी खत्म हो जाएगा! सच्चा प्रेम पाने के लिए मुझे किसी नए युग में जन्म लेना पड़ेगा, क्योंकि यह कलयुग मेरे लिए नहीं है!” उसके शब्दों से उसकी आँखें बुझ जाती हैं!

चौथी मोमबत्ती के सामने तीनों मोमबत्तियाँ अपने प्राणों को त्यागकर बुझ जाती हैं और अंधेरे कमरे में और भी अधिक अंधकार हो जाता है!

चौथी मोमबत्ती एकमात्र होती है, और वह खुद से कहती है, “मैं आशा हूँ! मुझे में आपार मनोबल है! हालांकि जीवन में कितनी भी कठिनाइयाँ हो, मैं आशावादी बनकर लड़ती रहूँगी! मुझे यह जीवन मिला है, और मैं इसका सम्मान करूँगी!”

मनोबल बढ़ाने वाली कहानी से सिख :

मनोबल बढ़ाने वाली कहानी समय सीख मिलती है कि हमें चौथी वाली मोमबत्ती बनना है. अगर हम चाहते वाली मोमबत्ती बनेगी तो जीवन हमारा सफल होगा सुखद होगा और बहुत ही आनंदमय होगा! हमे भी अपना मनोबल और आत्मविश्वाश हमेशा बढ़ाये रखना है!

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