प्रेरणादायक कहानी – कचरे का डिब्बा

आज आज हम एक वास्तविक प्रेरणादायक कहानी के बारे में बात करने वाले हैं ! जो आपके जीवन को बदल के रख देगा ! यह मेरे घर का प्रसंग है,

तो शुरू करते है प्रेरणादयक प्रसंग,

मैं जब भी सुबह उठता था तो मेरा नियम होता है की फ्रेश होकर सूर्य नमस्कार करना ! मेरे पिताजी भी सुबह उठकर उनका नियम है कि वह 25 मिनिट योगासन में बैठना !

उस दौरान हमारे घर का दरवाजा उसी समय सुबह सुबह टक- टक बजता था !

दरअसल, उस समय मैं हमेशा मेरे कमरे से जोर से बोलता मम्मी कचरे वाले आए हैं आप कचरे का डब्बा बाहर ला दो !

इस तरह हमारा रोज का यह अनुभव हमेशा समान होता ! मेरे घर पर सबसे प्यारी समझदार छोटी सी बालक है उसकी उम्र 5 वर्ष से भी कम है !

वह हमेशा यह सुनती थी की कचरा वाला आया है जरा कचरे का डब्बा बाहर रखो और कभी-कभी कचरे का डिब्बा भी छोटी सी बालक ही लाकर बाहर रख देती!

एक दिन अचानक छोटा सी बालक मुझे आकर पूछती है ! यह रोज तो सुबह आते है यह कौन है ?

मैं बोलता हूं यह कचरे वाले है ! तब वह जवाब देती है कि आप गलत हो ! यह कचरे वाले नहीं है !

कचरे वाले तो हम है और सबसे बड़े कचरे वाले तो आप हो ! ये सुनकर मैं दंग रह जाता हूं, तब वह कहती है परेशान मत हो जाओ ! मैं आपको बताती हूं कि मैंने ऐसे क्यों कहा ?

तब गुस्से से बोलता हूं, हां बताओ बताओ आज कल के बच्चे कुछ भी बोलते है ? बताओ क्यों बोला ? तब वह प्यार भरे स्वर में कहती है की चाचू वह कचरे वाले नहीं है वह सफाई वाले है !

कचरा तो हम कर रहे हैं वह तो बिचारे कचरा साफ कर रहे हैं ! अब मुझे बताओ कचरे वाला कौन हुआ ?

यह उत्तर सुनकर मैं चुप हो गया और दूसरे दिन सब कुछ समान था पर फर्क इतना था की मैं मम्मी की तरफ मुस्कुरा कर बोलता कि मम्मी सफाई वाला आया है और मम्मी हंसकर बोलती हा पता है वह सफाई वाले है और हम कचरे वाले है !

निष्कर्ष :

मुझे जो सिख पांच साल के बच्चे से मिली वह मेरे जीवन के नजरिया बदल दिया !
जो ५ साल की बच्ची ने सिखाया वह मैने बड़े बड़े से बड़े मोटिवेशनल स्पीकर से भी नही सीखा !

मोटिवेशनल स्पीकर जो बाते करते उनका प्रभाव सिर्फ १० मिनिट तक ही रहता ! जो बच्ची ने सिखाया वह प्रभाव जीवन भर रहेगा !

हमको हमेशा सीखना सब से चहिए भले वह कोई भी हो क्योंकि पता नही जिस सवाल की तलाश है उसका उत्तर वही से ही मिल जाए !

 

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